सोमवार, 12 दिसंबर 2022

गहलोत का गुजरात चुनाव

                              Indian Politics-Ashok Gahlot and Gujarat election

 



अशोक गहलोत जौ की राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं को कांग्रेस ने उन्हे गुजरात चुनाव प्रभारी बनाया ।। गहलोत जी कल मीडिया से मुखातिब हुये और हार के निम्न कारण मीडिया के सामने बताये।। सबसे बड़ा कारण दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बताया की और कहा की ये लोग जँहा भी जाते है बहुत बड़ी बड़ी झूँठ बोलते हैं और कांग्रेस के वोट बैंक को सेंध मारने मे कामयाब होते है ।इस बार भी 13% वोट शेयर लेके इन्होने कांग्रेस को बड़ा नूकसान पहुंचाया।। इसके अलवा प्रधानमंत्री की पिछले 3 महिने से गुजरात मे ताबड़तोड़ रैलियाँ भी हार का एक बड़ा कारण रहा व तीसरा व महत्वपूर्ण भूमिका रही वो था पार्टी के पास फंड की कमी का होना।।और साथ ही गहलोत जी ने भाजपा पे आरोप भी लगाया की पार्टी मे फंड देने वालो को संस्थाओ का डर दिखाया जा रहा हैं ।। यह सही है की आम आदमी पार्टि व ओवेशी हर चुनाव मे कांग्रेस के वोट मे सेंद लगाने मे कामयाब होते हैं इसका कारण है कांग्रेस का अपने वोट बैंक व कार्यकर्ताओ पर ढीली पकड़ जौ गहलोत नी आला कमान का फैसला ना मानके ही सिध कर दिया था और सोनिया राहुल को मुह की खानी पड़ी थी।। दूसरा राहुल की पैदल यात्रा का महिमा मंडित करने मे अधिक ध्यान दिया जा रहा है वंही पे गहलोत कांग्रेस के कार्यकर्ताओ मे गुजरात मे जान फूंकने की बजाय स्वयंं निस्क्रिय रहे और हार के बात पार्टी दफ्तर मे कार्यकर्ताओ ने हंगामा करके ये बात मीडिया मे सम्ने रखी की कांग्रेस मे कार्यकर्ताओ के साथ कोई सक्रिय संवाद स्थापित नही किया गया और आपसी खिंचा तान चलती रही।।

कांग्रेस आलाकमान का गहलोत को प्रभारी बनाना भी गलत साबित हुया क्योंकि गहलोत के मन मे पायलट खेमे का डर हमेशा मन मे बना रहता है जिससे उसका असर सरकार के चल रहे कर्यो पर भी साफ साफ देखा जा सकता हैं ।। पिछले कुछ सालो से राजस्थान मे लो & ऑर्डर की स्थति बहुत बिगड़ी हुई हैं ।। बलत्कार व लुटपाट की घटनाओं मे भी बहुत अधिक इज्जफा हुया है ।। अधिकारी वर्ग दबा कर भ्रस्टाचार मे लिप्त हैं जौ आये दिन न्यूज़ पेपर की हैडिंग बने हुये है ।। ऐसी स्थिति में गहलोत को प्रभारी बनाना ही गलत निर्णय था।। वंही पे हिमाचल मे इसके विपरित कांग्रेस एकजुट होके चुनाव लड़ा और बिना आलाकमान के कुछ खास हस्तक्षेप के सरकार बनने मे कामयाब हुया । रैलियाँ वँहा भी मोदी जी खुब हुई हैं केजरीवाल & टीम वँहा भी सक्रिय भूमिका में थी। इसलिए गहलोत जी अपने चिर परिचित अन्दाज से हमेशा जिमेदारी लेने के बजाय ठिकरा दूसरो के सर पर फोड़ने मे माहिर है और उन्होने हार की  व्यक्तिगत जिमेदारी लेने के बजाय। अन्य कारणों को बता कर अपने दाईत्व को इतिश्री पूरी की है ।। यह राजस्थान के परिवेक्ष मे भी कांग्रेस के लिये ठिक नही होगा।।

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