सोमवार, 24 अप्रैल 2023

भारत में क्रिकेट सट्टेबाज़ी ऐप्प और सट्टा बाजार को बढ़ावा देते क्रिकेटर /शीर्ष बेटिंग ऐप्स/भारत का दुर्भाग्य जिनका मार्गदर्शन ऐसे लोग कर रहे हैं।

 भारत का दुर्भाग्य जिनका मार्गदर्शन ऐसे लोग कर रहे हैं।


इस समय भारत के साथ पूरी दुनिया में IPL का भुखार चढ़ा हुआ हैं।  और जनता में खेलो के प्रति  ये जुनून होना भी चाहिए क्योंकि खेल हमारे सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। क्योंकि खेल हमें मनोरंजन के साथ प्रतिस्पर्धा और आपसी तालमेल के साथ जीवन में परिस्थति अनुसार निर्णय लेना सिखाते हैं।

        और जनता जनार्दन भी इन खेल और खिलाड़ी को भरपूर प्यार और दौलत शोहरत सब देती हैं।  लेकिन मुझे ये कहने में कोई हैरानी नहीं होती की ये खिलाड़ी बहुत जल्द इसी जनता को गर्त में धकेलने के काम में लग जाते हैं।

        वर्तमान में भारत में सट्टा खेलना और खिलाना दोनों ही गैर-कानूनी हैं। क्योंकि  सट्टा जिसको हम जुहा खेलना भी कहते हैं। इसमें व्यक्ति अधिक कमाने या अपने प्रिडिक्शन्स को सही ठहराने के लिए पैसा लगाता हैं और और जब वो जीत जाता हैं तो उसके मन में और लालच आता  हैं और वो और पैसा लगाता हैं। और उसे एक समय के बाद इस लालच की आदत पड़ जाती हैं।  और यदि वो हार जाता हैं तो उसे वापस पाने का जुनून उसे इसमें धकेलता हैं। और ये सट्टा ऐप्प कंपनीया 20 से 25 % लोगो को मुनाफा देकर बाकि 80 % का नुकसान पहुंचाती हैं। और मोटा पैसा कमाती हैं।इसमें से कुछ पैसा ये इन खिलाड़िओं को देती हैं जिनके इन्फ्लूंस से ये भोलेभाले लोग अपनी टीम बनाकर सट्टा खेलना शुरू करते हैं।  कानूनी दावपेच से बचने के लिए ये अपने विज्ञापन में धीर से कह देते हैं की ये सब आप अपनी  जोखिम से कर रहे हो। 

         ये सभी खिलाडी सामान्य परिवारों से आते हैं लेकिन इनको जो सम्मान और शोहरत मिलती हैं उसमे चकाचौंद  में ये अपना देश धर्म भूल जाते हैं और थोड़े पैसो के लिए देश की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के रास्ते  पे धकेलने का कार्य करते हैं।  हमें नहीं भुलना चाहिए की हर नागरिक का देश धर्म सर्वोपरि होता हैं। यदि चंद्रशेखर आजाद,भगत सिंह राजगरु ये लोग केवल अपनी सोचते तो हमारा देश कभी भी गुलामी की बेड़ियों से मुक्त नहीं होता। आज भी कुछ लोग जो तकनिकी और मनोविज्ञान की समझ रखते हैं वो लोग इन लोगो को लालच देकर इन पर अत्याचार कर रहे हैं और इनमे साथ दे रहे हैं हमारे ये खिलाड़ी जिनको हम पागलो की तरह सम्मान देते हैं।  यह हमारे देश का दुर्भाग्य होगा की समय रहते इन पर लगाम नहीं लगाई गई।

        भारतीय जनता को जगना होगा और इसका विरोद्ध करना होगा। विऱोध करने का मतलब यह नहीं हैं की हम खले या खिलाड़िओं का विरोध कर रह हैं। जिस प्रकार से स्टेडियम में चोको और सिक्स की तख्तियां लहराते हैं , अपने शरीर पर टैटू गुदाते  हैं वैसे ही हमें अपना विरोध का स्वर बुलंद करना होगा। सोशल मीडिया पर विऱोध प्रकट करना होगा।  अन्यथा जिस प्रकार से अक्षय कुमार,शारुख खान,अजय देवगन हुए सलमान खान को गुटखा का विज्ञापन देने से कोई परेशानी नहीं होती चाहे पूरा देश कैंसर से ग्रसित हो जाये इनको पैसा चाहिए।  ये गुटखा क्या अपने परिवार के लोगो को खिला सकते हैं। क्या इन खिलाड़ियों के परिवार के लोग टीम 11 पर अपनी टीम बनाकर सट्टा खेलते हैं,नहीं ना क्योंकि इनको पता हैं इस प्रकार से पैसा नहीं कमाया जा सकता।


 

         और यदि कोई इसे सही ठहरता हैं और सट्टा को इनका पेशा बताने  की हिमाकत करता हैं  तो फिर चोर का का चोरी करना, किलर का मर्डर करना,किड़नेप्पर का किडनेप करना भी उनका कार्य होता हैं।  और वो भी अपनी रोजी रोटी के लिए ये सब करते हैं।

      लेकिन हमें नहीं भूलना किये की ये सब असामाजिक कृत्य की श्रेणी में आते हैं।  इसी प्रकार किसी खिलाडी ,अभिनेता,पब्लिक फिगर को ऐसी चीजों का विज्ञापन  करना और बढ़ावा देना समाज और देश को नुकसान करने के कृत्य की श्रेणी में मन जाना चाहिए।

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