शनिवार, 18 मार्च 2023

राजस्थान में अब 50 जिले-मरूप्रदेश की नींव

 राजस्थान और मरूप्रदेश की नींव

(जयपुर और जोधपुर )

       राजस्थान भौगोलिक स्थिति में भारत का सबसे बड़े राज्य में शुमार हैं। और जिला मुख्यालय की अत्यधिक दूरी होने के कारण दूर दराज के लोगो के लोगो की समस्या के साथ विकास में भी बाधक रहा हैं। जिस गति से छोटे राज्यों ने परिसीमन कर के नए जिलों का निर्माण किया उन्होंने उसी गति से विकास भी किया। राजस्थान में 33 वा जिला प्रतापगढ़ 2008 में बना था। उसके बाद लंबे समय से जनता की यह मांग थी इतने बड़े राज्य में जिलों की संख्या अधिक होनी चाहिए । आखिरकार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनावो के मध्य नजर रखते हुए ही सही जनता को ये बड़ी सौगात दी हैं। और अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया हैं।इसलिए यह कदम प्रशंसा के योग्य हैं।निश्चित ही आने वाले समय में ये जिले राजस्थान के आधारभूत संरचना,विकास,सामाजिक सुरक्षा,रोजगार और राज्य को आर्थिक विकास के मोर्चे पर अपना योगदान देने में सहायक सिद्ध होंगे। गहलोत ने इसके लिए 2000 करोड़ के बजट का भी प्रावधान किया हैं।

नए जिले वर्तमान 13 जिलों से बनाए गए हैं और साथ में तीन नए संभाग भी बनाए गए हैं। जिनको मिलाकर अब राजस्थान में 10 संभाग और 50 जिले होंगे।

अब 10 नए संभाग

1 सीकर

2 पाली

3 बांसवाड़ा


नए जिलो की लिस्ट तथा किस जिले से जन्म हुआ।


1.नीमकाथाना (सीकर)

2.जयपुर उत्तर(जयपुर)

3.जयपुर दक्षिण(जयपुर)

4.कोटपुतली(जयपुर)

5 दूदू(जयपुर)

6.खैरथल(अलवर)

7.डीग ( भरतपुर)

8. गंगापुर सिटी (सवाई माधोपुर)

9.शाहपुरा (भीलवाड़ा )

10.सलूंबर(उदयपुर)

11. सांचौर (जालौर)

12.बालोतरा(बाड़मेर)

13.जोधपुर पूर्व (जोधपुर)

14.जोधपुर पश्चिम(जोधपुर)

15.फलोदी(जोधपुर)

16.अनूपगढ़(श्री गंगानगर)

17.डीडवाना(नागौर)

18.ब्यावर(अजमेर)

19.केकड़ी(अजमेर)


निश्चित विपक्ष इसको चुनावी घोषणा कहेगा। लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद पक्ष और विपक्ष दोनो ने खुशी का इज़हार किया हैं जो बताता हैं की आने वाले समय में यह निर्णय राजस्थान की आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र के साथ में देश को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।


नया रूप क्या होगा

नए संभाग और नए जिले बनने के बाद का स्वरूप कैसा होगा ये सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद ही पता चल पाएगा।


सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती।

नए संभाग और जिलों के स्वरूप को धरातल पर लाना कोई आसान काम नही होगा। इसमें बहुत अधिक राजनेतिक और सामाजिक समावेश की आवश्यकता होगी। प्रशासनिक ढांचा तैयार करना भी एक बड़ी चुनौती होगी

     प्रशासनिक रिकॉर्ड्स को विस्थापित करना, नई कागज कारवाई जिसमे आधार कार्ड से लेके वोटर कार्ड,राशनकार्ड,नरेगा जॉब कार्ड्स सब कुछ बदलना होगा। जिसके लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता होगी। यह आने वाली सरकार के लिए एक चुनौती पूर्ण कार्य होगा। ये निश्चित हैं की राज्य में आगे किसी की भी सरकार आए। अगले पांच वर्ष के लिए सरकार को नया काम ढूंढने की आवश्यकता होगी नही। इन नए जिलों के विकास के लिए लिए मॉडल तैयार करना और पूर्ण करना ही सरकारों की सफलता और असफलता के मुख्य मापदंडों में से एक होगा

      यह सही हैं की राजस्थान कांग्रेस ने गहलोत के नेतृत्व में यह कार्य काल चुनौतीपूर्ण रहा हैं सरकार पर विपक्ष के साथ साथ आंतरिक खींचातान का भी सामना करना पड़ा हैं। गहलोत का यह फैसला अपने अनुभव और सभी को साथ लेकर चलने की नीति के कारण इन चुनौतियों के बावजूद अपने 5 साल का कार्यकाल ही पूर्ण नहीं कर रहे हैं बल्कि आने वाले 5 साल के लिए रास्ता साफ करने की और एक कदम आगे बढ़ाने वाला साबित हो सकता हैं

 यदि  राजस्थान में राहुल और सोनिया का हस्तक्षेप कम होता हैं तो गहलोत कांग्रेस की इस नया को पार लगाने में कामयाब हो सकता हैं।


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