शनिवार, 25 फ़रवरी 2023

यूक्रेन युद्ध का एक वर्ष।

रूस यूक्रेन की जंग में दुनिया की हार 



दुनिया  में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे अधिक जानें रूस - यूक्रेन युद्ध में हुई हैं। 24 फरबरी 2022 के अल सुबह जब रूस ने हमला बोला तो किसी ने नहीं सोचा था की ये लड़ाई 21वी सदी में दो पड़ोसी देशों में इतना लंबा पारंपरिक युद्ध चलेगा।

युद्ध का एक साल क्या खोया क्या पाया।

इस युद्ध ने यूक्रेन को ध्वस्त कर दिया हैं। यूक्रेन की बड़ी आबादी को अपने देश से भाग के पड़ोसी देशों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है। रूस ने इस एक साल में यूक्रेन की करीब 17% जमीन को कब्जा लिया हैं।इसमें इज्यूम,सेवरोडोनेटिक, लुहानक, डोनबस,डोनेट्सक,मरिउपोल, मेलिटोपोल मुख्य शहर हैं जंग रूस की सेना का नियंत्रण हैं। इस जंग में रूस ने 2 लाख सैनिक के मारे जाने व घायल होने की सूचना हैं। वन्ही पे यूक्रेन ने भी 1.50 लाख सैनिक और 30 हजार से अधिक आम लोगो की जाने गई हैं। एक साल के बाद जान्हा पे दोनो देश ही विजेता बने हुए हैं पर इससे मानवता की हार हुई हैं।और IMF के अनुसार इस युद्ध से 1 लाख करोड़ डॉलर के उत्पादन के बराबर नुकसान हुआ है।IMF के अनुसार सबसे अधिक धनी देशों में भी उपभोक्ता किमतो में 7.3% की बढ़ोतरी हुई हैं।जो पूर्वानुमानों से दुगनी के लगभग हैं।जबकि गरीब देशों में ये किमते 9.9% की वृद्धि दर्ज की गई हैं। यूक्रेन की GDP तबाह हो चुकी हैं। जबकि रूस का भारत जैसे देशों से आयात -निर्यात 9 अरब डॉलर से  बढ़कर 35 अरब डॉलर पर पहुंच गया हैं।

शरणार्थी महिलाओं के साथ देह व्यापार का खतरा।

इस युद्ध से जो मानवता का सबसे बड़ा संकट हैं।अपने घर से बेघर होना। इस दर्द को कोई नहीं समझ सकता जिसका आशियाना छूटता हैं वही इसे समझ सकता हैं। करीब 80 लाख लोग यूक्रेन छोड़ कर यूरोपीय देशों में चले गए हैं। इनमे अधिकतर ने पोलैंड में शरण ली हैं।इसके बाद रोमानिया,मोलधोवा,हंगरी, स्लोवाकिया मुख्य देश हैं जिन्होंने इन लोगो को शरण दी हैं। इन शरणार्थियों को संख्या किसी भी देश से पलायन करने वाले देशों में सबसे अधिक हैं। इससे पहले केवल वेनेजुएला से 32.9 लाख और अफगानिस्तान से 25.3 लाख और इराक युद्ध में 24 लाख लोगो ने अन्य मुल्कों में शरण ली थी।। ऐसे समय भुखमरी,रोजगार,कुपोषण के साथ साथ बच्चो की शिक्षा और बुजुर्गो के लिए स्वास्थ सेवाएं। और महिलाओं पे देह व्यापार का खतरा बढ़ता जाता हैं क्योंकि 60 वर्ष से कम उम्र के लोगो को यूक्रेन ने लड़ाई में शामिल होने के कारण जाने पर प्रतिबंध लगा रखा हैं।ऐसे में ये महिलाएं अपने बच्चो,बुजुर्गो के साथ अजनबियो पर भरोसा करने को मजबूर हैं।क्योंकि ऐसे वक्त पे हर देश में मानव तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं।क्योंकि लोग वोलेंट्री के रूप में अपना उलू सीधा कर पाने में सफल होते हैं।

अमेरिका और NATO देश 

बाइडेन की यात्रा से मसला और गर्म हो गया हैं। बाइडेन ने अचानक यूक्रेन पहुंचकर दुनिया को चौंका दिया और यूक्रेन को 500 मिलियन डॉलर की मदद करके व उसी समय जेलेंशकी की चीन को युद्ध से दूर रहने की चेतावनी देके इसे और पेचीदा बना दिया हैं।क्योंकि जेलेंस्की ने कहा हैं कि चीन रूस का साथ देता हैं तो ये विश्वयुद्ध हो जायेगा।


 

NATO जो इस युद्ध का मूल कारण हैं 

क्योंकि यूक्रेन के नाटो के सदस्य बनने की जिद्द के कारण ही। रूस को अपनी संप्रभुता का खतरा लगा और युद्ध छिड़ गया।और अब नाटो के सभी 30 देश खुल कर यूक्रेन का साथ दे रहे हैं। जो विश्व शक्ति रूस को मंजूर नहीं हैं।रूस के राष्ट्रपति ब्लादीर पुतिन ने युद्ध शुरू होने से पहले ही यह साफ कह दिया था की इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। रूस अपनी सुरक्षा करने में सक्षम हैं। बाइडेन की यात्रा के तुरंत बाद रूस ने अमरीका के साथ परमाणु समझौता भी तोड़ दिया हैं और ये कदम युद्ध को विश्वयुद्ध की और लेजाने वाला साबित हो सकता हैं।

भारत और चीन की शांति की पहल

गुरुवार को संयुक्त महासभा में रूस के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया गया जिसमे रूस तुरंत यूक्रेन से बाहर निकलने के लिए कहा गया । इस प्रस्ताव के पक्ष में 141 वोट पड़े और विरोध में केवल 7 वोट पड़े,32देशों ने इस प्रस्ताव में मतदान नही किया। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति का वक्तव्य  की हम मजबूत हैं और हम युद्ध में रूस को हरा देंगे। ये बताने के लिए काफी हैं की ये युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की और बढ़ता नजर आ रहा हैं। भारत ने यूएनओ में इस युद्ध को रोकने के लिए किए गए प्रयासों पर सवाल उठाए ।और नाकामयाबी बातें और चाइना ने शीत युद्ध की मानसिकता से बाहर आके 12 सूत्रीय शांति प्रस्ताव दिया जिसमे कहा गया की हर देश को संपूर्भुता का समान होने की बात कही गई है।शांति के प्रयास की शुरुवात हो, मानवीयता के लिए युद्ध बंधी और शरणार्थियों की सुरक्षा की बात कही गई।एकतरफा प्रतिबंधों को समाप्त करना होगा।अनाज और औद्यौगिक आपूर्ति के लिए एक्सपोर्ट और इंपोर्टेंट को वापस चालू करना होगा। और जो नुकसान इंफ्रास्ट्रक्चर को हुआ हैं उसका पुननिर्माण की योजनाओं को बात भी मुख्य रूस से करनी चाहिए।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने शांति के लिए चीन की पहल का स्वागत किया हैं और शांति के लिए वार्ता के लिए तैयार रहने की बात की हैं।भारत शुरू से ही तटस्थ रहते हुए युद्ध को छोड़ शांति के लिए बातचीत का रास्ता ही सबसे सही रास्ता सुझाया।

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