शुक्रवार, 7 अप्रैल 2023

सचिन पायलट का अपनी सरकार के खिलाफ अनशन

 

राजस्थान कांग्रेस में फिर सचिन गहलोत आमने सामने


    सचिन पायलट का अपनी सरकार के खिलाफ अनशन.यह सही हैं की राजस्थान कांग्रेस का कार्यकाल 4 साल पूरा कर चुका हैं। और कांग्रेस की गहलोत सरकार कांग्रेस और भाजपा के आपसी विवादो से अधिक सचिन और गहलोत खेमों की गहमागहमी की चर्चा रही है। यह आपसी मतभेद कांग्रेस के गले की फांद बन चुका है। और इसका सीधा सीधा असर राष्टीय कांग्रेस की नाकामी को दर्शाता है। जो पार्टी गत 4 वर्ष से अपनी अनुरूनी समस्याओं को निराकरण करने में असफल रही हैं उसपे जनता का विश्वास आना आसान नहीं होगा।



        अब सचिन पायलट ने एक बार फिर अपनी आवाज मुखर करते हुए 11 अप्रैल को जयपुर शाहिद स्मारक पर एक दिन का धरना देने का ऐलान कर दिया हैं। और यह अनशन गहलोत के खिलाफ होगा। सचिन ने गहलोत पे सीधे सीधे आरोप लगाते हुए।कहा की उनकी मिलीभगत वसुंधरा राजे के साथ हैं। क्योंकि पिछले चुनाव में वादे के अनुसार भ्रष्टाचार के खिलाप गहलोत सरकार ने कोई कार्यवाई नही की। जिसको जनता के साथ धोका हुआ हैं। और गहलोत ने बीजेपी के खिलाफ जो भी भ्रष्टाचार के मामले थे किसी पे कोई कार्रवाई नहीं की।और मिले जुले खेल में सारे मामले दबा दिए गए।
 

वसुंधरा सरकार के विपक्ष में रहते हुए गए थे भ्रष्टाचार के मुद्दे।

        सचिन ने कहा की विपक्ष में रहते हुए हमने कड़ा संघर्ष किया ।जिसके कारण कांग्रेस सत्ता में वापसी कर पाई। अब हमे वापस जनता के बीच में जाना हैं उनसे किए हुए वादों जा जवाब देना हैं.सचिन ने कहा की वो 28 मार्च और 2 नवंबर का गहलोत साहेब को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के मामले में कारवाई की मांग कर चुके हैं पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई हैं।

खनन माफिया और पेपर लीक घोटाला।

     सचिन पायलट का अपनी सरकार के खिलाफ अनशन से पहले सचिन खनन माफिया और पेपर लीक घोटाले पर किसी भी मंत्री और अधिकारियों पर कार्यवाई ना करने को लेकर गहलोत को जादूगरी कह कर तंज कस चुके हैं।क्योंकि बंद तिजोरी में बंद कागज छात्रों तक कैसे पहुंचे इसमें  कोन सी जादूगरी हैं।

मुख्यमंत्री पद की लड़ाई

       यह सही हैं की सचिन पायलट ने पिछले विधानसभा में जी जान से मेहनत को और कांग्रेस को सत्ता में लाने का मुख्य किरदार निभाया। गहलोत साहब जो गांधी परिवार की नजदीकी का फायदा उठाया और पायलट की मेहनत पर पानी फेर दिया।और खुद मुख्यमंत्री बन गए। 

      राजनीति के मंजे हुए गहलोत जहां पर भाजपा के साथ सतरंज का खेल खेलते लेकिन उन्होंने अपनो को ही अपनी जादूगरी के जाल में ऐसा फसाया की सचिन पायलट अभी तक उससे पार नहीं कर पाए हैं। और एक साधारण MLA बनाकर छोड़ दिया।राजनीतिक में महत्वकांक्षा होनी चाहिए लेकिन गहलोत ने एक जुझारू साथी को अपने साथ जोड़ नही पाए और मुख्यमंत्री बनकर कमान अपने हाथ में लेली।

कांग्रेस राजस्थान प्रभारी रंघावा का वक्तव्य

      AICC की ओर से प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रंधावा ने कहा की में 5 महीने से राजस्थान का प्रभारी हूं सचिन ने कभी अपना विरोध दर्ज नहीं कराया,पायलट को अपनी बाद पार्टी के अंदर उठानी चाहिए थी यह उपवास को पार्टी विरोधी गतिविधि के तौर पर देखा जायेगा।।
 

      जब एक नेता मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिख रहा हैं। जनता से किए हुए वादों को पूरा करने की बात कर रहा हैं। और वादों पर एक्शन नही होने पर अपनी ही सरकार के विरोध में अनशन कर रहा हैं तो इसमें गलत क्या हैं। रंघवा को 5 महीने में यह समझ नही आया या गहलोत ने अपने हिसाब से समझा दिया।।
     सचिन और पायलट का विवाद निश्चित कांग्रेस को राजस्थान से सफाया होने में मददगार साबित होगा। गुलाब नबी आजाद ने आप की आदलत में सही कहा था की कांग्रेस को नुकसान चाटुकार कर रहे हैं पार्टी का लोकतंत्र समाप्त हो चुका हैं और इन सब के लिए सोनिया और राहुल जिम्मेदार हैं।

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